Saturday, November 19, 2016

एक उम्मीद : देश और देशवाशियों के लिए

क्या ये कोई समय अंतराल है जो बस आया है जाने के लिए या ये थम जाने वाला है लोगों उम्मीदों की तरह ,
क्या ये नयी सुबह का आगाज है जो सूरज की रौशनी से आँखों की किरण सबों की  उम्मीद है ,
उम्मीद है एक बेहतर कल की , उम्मीद है एक सोच की जो सबकी भलाई और सबके विकास की दिशा तय करे
यही उम्मीद सबल है लोगों का जो कई परेशानी को नज़रन्दाज करके भी , उम्मीद का दमन थामे है और टकटकी लगाये देख रही है एक बेहतर कल की ओर , एक बेहतर भविष्य की ओर , जिसे सालों  बाद कोई मिला है  ....... देश और देशवाशियों के लिए !!!