मुझे मालूम नहीं
अब ये राहें कब मुरेगी , कब तक ये धुप रहेगी
कब छाँव मिलेगा , मुझे मालूम नहीं l
कब तक नींद के आगे कोसो दूर वो चैन मिलेगी
कब वो ख्वाब बसर होगी ,मुझे मालूम नहीं l
कब तक ये कारवां यूँ ही चलता रहेगा
कब पनाह मिलेगी आस को साँझ की, मुझे मालूम नहींl
पर मुझे मालूम है की आगे जाना, और आगे जाना है
आँखों में मंजिल और खवाबो में साहिल ले, और आगे जाना है
मुझे मालूम है ll
.........शशांक शेखर ...
अब ये राहें कब मुरेगी , कब तक ये धुप रहेगी
कब छाँव मिलेगा , मुझे मालूम नहीं l
कब तक नींद के आगे कोसो दूर वो चैन मिलेगी
कब वो ख्वाब बसर होगी ,मुझे मालूम नहीं l
कब तक ये कारवां यूँ ही चलता रहेगा
कब पनाह मिलेगी आस को साँझ की, मुझे मालूम नहींl
पर मुझे मालूम है की आगे जाना, और आगे जाना है
आँखों में मंजिल और खवाबो में साहिल ले, और आगे जाना है
मुझे मालूम है ll
.........शशांक शेखर ...
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